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प्लास्टिक से दैनिक जीवन में प्रभाव

         

 प्लास्टिक से होने वाली लाभ और हानिया



 प्लास्टिक इसे आज कौन नहीं जानता है। जो आज हमारे दैनिक जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। प्लास्टिक का उपयोग लगभग हर एक जगह किया जाने लगा है। फिर चाहे वह मोबाइल, टीवी, कार या एक छोटा टूथब्रश ही क्यों न हो। जहां विश्वस्तर पर प्लास्टिक का उपयोग बढ़ता जा रहा है। वाही भारत में भी बढ़ती जनसंख्या प्लास्टिक के उपयोग में वृद्धि हुई है। और यह लोगो के रोजमारा को जिन्दगी में एक एहम हिस्सा बन गई है। वाही हमारे जीवन के लिए अभिशाप बनती जा रही है। इसके ज्यादा इस्तेमाल के कारण पर्यावरण प्रदूषित होता जा रहा है। जैसे आज यह हमारे लिए हर तरीके से मददगार है। वाही दूसरी तरफ़ यह हमारे जीवन हर जगह प्रदूषण फैला रही है। और इसका निदान भी आसान नहीं है।


प्लास्टिक का इतिहास



अलेक्जेंडर पाकर्स ने सर्वप्रथम 1862 में परकेशीन के रूप में इसका पेटेंट कराया था। यह पहला प्लैक्टिक माना जाता है। अलेक्जेंडर को खुद इसमें ज्यादा सफलता नहीं मिली। आगे चल कर इस विषय में और भी ज्यादा विकाश हुआ। और एक अच्छी प्लास्टिक का निर्माण सर्वप्रथम jhon वेशली ह्यात ने किया था। जिन्होंने बाद में सेलुलोज मेन्युफेक्चरिंग फेक्ट्री की स्थापना की। और शुरुआत में कुछ प्लास्टिक बस्तुओ का निर्माण किया। आगे चल कर 1930 में इथलीन और प्रप्लेन से पॉलिथीन का निर्माण होने लगा। 1960 के दौरान इस इंडस्ट्री में बहुत तेज़ी आई। 90 के दशक के आते-आते प्लास्टिक का कुल उत्पादन 85 मिलियन टन था और आज लगभग 120 मिलियन टन के आस पास है। और भविष्य मे और भी ज्यादा बड़ने की आंशका है। 

प्लास्टिक का निर्माण और प्रकार


इस समय को हम प्लास्टिक का युग कहे तो कहना गलत नहीं होगा। वैज्ञानिक भाषा में प्लास्टिक को संश्लेषित तथा अर्ध संश्लेषित कार्बनिक ठोस पदार्थों का एक समूह है। प्लास्टिक उच्च अणु भार वाले बहुलक होते है। प्लास्टिक वास्तव में बहुलीकरण प्रक्रिया द्वारा बनया जाता हैं। जो रसायनिक प्रक्रिया है। इसका उत्पादन वैसे प्रक्तिक गैस, प्राथमिक रसायन के संश्लेषण बनाई जाती है।

 


          प्लास्टिक दो प्रकार की होती है।

1. थर्मो प्लास्टिक: यह वह प्लास्टिक होती हैं जो कि गर्म करने पर कई रूपों में बदल जाती हैं। जैस पोलिथिन

2. थर्मों सेटिग प्लास्टिक: यह वह प्लास्टिक होती हैं। जो गर्म करने पर सेट हो जाती हैं। 

 उपयोग के आधार पर 

यह भी दो प्रकार की होती है।

1 कम घनत्व वाली----इसका उपयोग सामान या वस्तुओ को भर कर ले जाने के लिए किया जाता है।

2 उच्च घनत्व वाली-----इसका प्रयोग भरी सामान को ले जाने केंटेनर जैसे के रूप में किया जाता है।

दैनिक जीवन में उपयोग,,


प्लास्टिक आज हमारे लगभग हर क्षेत्र में प्रयोग की जा रही है। और दैनिक जीवन में इसका एक बड़ा प्रोयोग है। जिनमें हम सबसे ज्यादा प्लास्टिक पोलिथिन के रूप में उपयोग करते हैं।


यह हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली बस्तूओ जैसे टीवी, चम्मच, प्लास्टिक बॉक्स, कुर्सी,टेबल, एलईडी लाईट इत्यादि सभी प्लास्टिक से बनने लगे है। दिन ब दिन इससे बनी वस्तुओ की जरूरत हमारे जीवन में बढ़ती जा रही है। अभी भारत में प्रति व्यक्ति 11 किलोग्राम उपयोग 2022 में 200किलोग्राम हो जायेगी और अमेरिका में प्रति व्यक्ति 109 किलोग्राम है। तथा यह जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुकी हैं।

प्लास्टिक से होने वाली समस्या

एक समय था। जब प्लास्टिक की जगह कागज़ के 


कैरी बैग और कागज़ और लड़की से बने वस्तुओ का निर्माण होता था जिससे जगलो में पेड़ों की कटाए बहुत तेज़ी से हो रही थी। यह एक संकट था। तब आगे चल कर प्लास्टिक की खोज़ हुए और इसे एक वरदान समझा गया क्योंकि इसके वजह से लकड़ी से बनी वस्तुओ की जगह प्लास्टिक का उपयोग किया जाने लगा था। पर यह हमारे पर्यावरण के लिए एक सबसे बड़ा खतरा बन गई है। जहा भारत की बात करे तो भारत का इससे दो मुख्य नदी तंत्र प्रभावित हुए है। इसके अलावा भारत में अकले एक साल में 35 लाख टन कचरा उत्पन्न होता हैं। जिसमें UNA के अनुसार सिंधु नदी में (1643220टन) तथा (72845टन) गंगा -ब्रहमपुत्रा नदी में डाला जाता है। जो कि नदियों से होते हुए समुद्र में चला जाता है जिसके कारण जलीय जीवन प्रभावित होता है। भारत में बस 60% ही कचरे का पुन चक्रण हो पता है । बाकि 40% अभी भी बच जाता है। वही पूरे विश्व स्तर आज तक का पर केवल 9% रिसाइकिल हो पाया है। 

प्लास्टिक का पुन चक्रण



रद्दी और बेकार प्लास्टिक को पुन चक्रण द्वारा प्रयोग में लाया जा सकता है। जो कई बार अपनी मूल आवस्था से बिलकुल अलग होते है। जैसे प्लास्टिक की बोतल को अगली पिघला कर टेबल बनाने में यूज किया जा सकता है। पर इसमें केवल PET प्लास्टिक का यूज किया जाता है। जैसे बोतल,रबर,प्लास्टिक बॉक्स, प्लास्टिक खिलौने आदि


प्लास्टिक को कम करने के सरकार के कदम,,,,,,



प्लास्टिक जैसे समस्या से छुटकारा पाने के लिए। सरकार ने बहुत से नियम और कानून बनाए है। और इस पर जुर्माना भी है।

1.  2 अक्तूबर 2019 से 2022 तक देश भर एकल प्लास्टिक वाले प्लास्टिक के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया 

2. यह योजना देश भर में प्लास्टिक पर काम से काम उपयोग करने को कहा है।

3. एकल प्लास्टिक वाले उत्पाद जैसे- प्लास्टिक बैग,कप, छोटी बोतल, स्ट्रॉ,और कुछ थेलियो पर 2 अक्टूबर 2019 से देश भर रोक लगा दी हैं।

जुर्माना


1.....1 जुलाई 2022 में सेंट्रल गवर्नमेंट ने सिंगल प्लास्टिक पर रोक लगा दी हैं

2...... आम सभी लोगो को 200₹ से 2000 तक जुर्माना

3....... सिंगल प्लास्टिक के उपयोग करते उदामितो को 20 हज़ार से 1 लाख तक और 5 साल की जेल का प्रावधान है।

4....वाही इसका उत्पादन अधिनियम 1986 के तहत धारा 15 प्रतिबंध है।






आशा करता हु। आपको इससे कुछ जानकारी मिली होगी आप भी पोलिथिन का उपयोग कम कर  पर्यावरण को बचा सकते है।





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